Pak में महिला टीचर्स के जींस व टाइट कपड़ों पर रोक, तो तालिबान में सिर्फ बच्चा पैदा करें महिलाएँ

Pak में महिला टीचर्स के जींस व टाइट कपड़ों पर रोक, तो तालिबान में सिर्फ बच्चा पैदा करें महिलाएँ

पाकिस्तान के संघीय शिक्षा निदेशालय (FDE) ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा पुरुष शिक्षकों को जींस और टी-शर्ट पहनने से रोकने के लिए भी अधिसूचना जारी की है। 

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने स्कूल और कॉलेजों के प्राचार्यों को एक पत्र भेजा है। पत्र में प्राचार्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रत्येक स्टाफ अपना पहनावा सही करे जिससे कि समाज में एक अच्छा संदेश जाए। पत्र में नियमित बाल कटवाने, दाढ़ी ट्रिमिंग, नाखून काटने, शॉवर और इत्र के उपयोग जैसे अच्छे उपायों के बारे में भी कहा गया है।

पत्र के मुताबिक, पाकिस्तान में शिक्षकों द्वारा ऑफिस समय के दौरान और आधिकारिक सभाओं एवं बैठकों में भी इन उपायों का पालने करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा महिला टीचर्स को सलवार, कमीज, दुपट्टा शाल पहनना अनिवार्य है। वो हिजाब भी पहन सकती हैं और चप्पल पहनकर स्कूल आने के लिए कहा गया है। वहीं, पुरुष शिक्षकों के भी जींस और टी-शर्ट पहनने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जा रही है। उन्हें क्लास रूम और लैब्स में टीचिंग गाउन्स या कोट्स पहनना जरूरी होगा।

पाकिस्तान के न्यूज चैनलों पर शिक्षा विभाग के इस फरमान के खिलाफ विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जिस मुल्क का प्रधानमंत्री ही यौन शोषण के लिए महिलाओं के लिबास को दोष देता हो, वहाँ तो इस तरह के फरमान जारी होने ही थे। लेकिन, उन्हें यह बताना चाहिए कि तीन साल की बच्चियों के साथ होने वाले रेप और मर्डर के लिए कौन से नियम लागू होते हैं। कुछ लोग इसे तालिबान का असर भी बता रहे हैं।

वहीं ताजा जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान में तालिबान शासन के गठन के बाद वहाँ पर महिलाओं की सरकार में भागीदारी को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। हालाँकि स्थानीय मीडिया ने तालिबान प्रवक्ता के हवाले से दावा किया है कि किसी भी महिला को वहाँ पर मंत्री नहीं बनाया जाएगा। उन्हें सिर्फ बच्चे पैदा करना चाहिए। स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज ने तालिबान के प्रवक्ता के हवाले से ट्वीट कर कहा, “एक महिला मंत्री नहीं हो सकती, यह ऐसा है जैसे आप उसके गले में कुछ डालते हैं जिसे वह सँभाल नहीं सकती। एक महिला के लिए कैबिनेट में होना जरूरी नहीं है, उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। महिला प्रदर्शनकारी पूरे अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।”

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आने के बाद से ही आम लोगों में काफी दहशत है। पिछले कुछ दिनों से काबुल समेत कई अन्य शहरों में तालिबान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। खास बात यह है कि इन प्रदर्शनों की अगुवाई महिलाएँ कर रही हैं। लेकिन तालिबान को ये प्रदर्शन रास नहीं आ रहा है।

यही वजह है कि वहाँ प्रदर्शन कर रही महिलाओं, आम लोगों और उन प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों पर तालिबान का गुस्सा बरस पड़ा है। तालिबान द्वारा अंतरिम सरकार के ऐलान करने के बाद काबुल में अलग-अलग जगहों पर महिलाओं द्वारा प्रदर्शन किया गया और सरकार में हिस्सेदारी की माँग की गई। सोशल मीडिया में कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहाँ तालिबान के लड़ाकों द्वारा महिलाओं को पीटा जा रहा है। तालिबान ने महिलाओं और पत्रकारों को डंडों और रायफल की बट से मारा। साथ ही कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें बुरी तरह से पीटा गया।

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