हिंदुत्व... राष्ट्रवाद... मोपला... वकील साई दीपक ने लाइव डिबेट में थरूर को कुछ यूँ धोया

हिंदुत्व… राष्ट्रवाद… मोपला… वकील साई दीपक ने लाइव डिबेट में थरूर को कुछ यूँ धोया

हाल ही में शशि थरूर और वकील जे साई दीपक के बीच थरूर की नई किताब, ‘द बैटल ऑफ बिलॉन्गिंग: ऑन नेशनलिज्म, पैट्रियटिज्म, एंड व्हाट इट मीन्स टू बी इंडियन’ की लॉन्चिंग के दौरान हुई चर्चा भारतीय इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालती है। साई दीपक ने इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता की आलोचना करते हुए 6 महत्वपूर्ण बातें कही हैं।

हिंदुत्व शब्द किसने गढ़ा?

अक्सर हिंदू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा (हिन्दुत्व) को विकसित करने का श्रेय हिंदू महासभा के नेता विनायक दामोदर सावरकर को दिया जाता है, लेकिन वकील साई दीपक का कहना है कि हिंदुत्व सावरकर द्वारा नहीं बनाया गया था, बल्कि उनके द्वारा इसे फैलाया गया था। हिंदुत्व शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1892 में चंद्रनाथ बसु ने किया था और बाद में इस शब्द को विनायक दामोदर सावरकर द्वारा लोकप्रिय बनाया गया।

उपनिवेशवाद की अवधारणा पर

साई दीपक के अनुसार, थरूर अपनी किताब में उपनिवेशवाद की अवधारणा को ठीक प्रकार से समझाने में चूक गए, जो उपनिवेशवाद के बाद के लोगों की अवधारणा है। वे अतीत में फिर से जाने की कोशिश कर रहे हैं। उसे फिर से नहीं बनाना, बल्कि अतीत के मूल्यों को एक स्वदेशी भविष्य का चार्ट बनाने के लिए वर्तमान की संस्थाओं में फिर से लिखना, जो एक एकीकृत दुनिया में संभव नहीं है। साईं दीपक के अनुसार, उनका विचार शायद उपनिवेशवाद के विरोध में स्वदेशी के अधिक से अधिक भाग के साथ एक बेहतर भविष्य बनाने का है। उन्होंने कहा, “यह विचार वर्तमान आंदोलन और इस समाज को जागृत करने के लिए उस व्यापक कैनवास के भीतर रखना है जिसे वैश्विक विद्वान डीकोलोनियलिटी (Decoloniality) के रूप में संदर्भित करते हैं।”

हिंदू-राष्ट्र की हिंदू-पाकिस्तान से तुलना पर

साई दीपक ने धार्मिक सभ्यता के महत्व के बारे में बात करते हुए कहा कि भारत का संविधान हमारी भूमि के लोगों की मूलभूत भावना को दर्शाता है, जिन्होंने बँटवारे के बाद भी कई कठिनाइयों के बावजूद अल्पसंख्यकों की रक्षा की और अपने पड़ोसियों की तुलना में बेहतर काम किया है। उन्होंने अपनी किताब में भारत को हिंदू-पाकिस्तान के रूप में ​बताने पर शशि थरूर की आलोचना की है। साई दीपक के अनुसार, धार्मिक सभ्यता या हिंदू राष्ट्र की हिंदू-पाकिस्तान से तुलना हमारे देश के लोगों का बहुत बड़ा अपमान होगा, क्योंकि बिना धर्मांतरण के विभिन्न धर्मों के लोगों के यहाँ सम्मान के साथ रहने की परंपरा रही है। यहाँ यह बताना जरूरी है कि हमारे पास यूरोप से निकली समकालीन संविधानवाद की अवधारणा नहीं थी, फिर भी भारत ने हमेशा उन लोगों का स्वागत किया है जो हमारे साथ रहने को तैयार हैं।

उपनिवेशवाद के फिल्टर पर

हिंदू सहिष्णुता पर शशि थरूर के दृष्टिकोण का खंडन करने के लिए साई दीपक ने अपनी पुस्तक में उपनिवेशवाद के फिल्टर का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि उपनिवेशवाद का यह फिल्टर सक्रिय रूप से हमारे देश के लोगों को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर गहरी नींद में डालकर अतीत के महत्वपूर्ण पहलुओं तक पहुँचने से रोकता है। वह शशि थरूर की कश्मीरी हिंदुओं पर ना बोलने, पश्चिम बंगाल में चुनाव के ​बाद हुई राजनीतिक हिंसा, असम में धर्म और पूर्वोत्तर में उग्रवाद की आलोचना करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि थरूर हमेशा से हिंदुओं को जाँच के दायरे में रखते आ रहे हैं। वे कहते हैं, “उपनिवेशवाद या औपनिवेशिक चेतना नामक एक फिल्टर है जो सक्रिय रूप से इस देश के अधिकांश लोगों को अपने अतीत के विशिष्ट पहलुओं तक पहुँचने पर रोकता है।”

राष्ट्रवाद के विचार पर

साई दीपक इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि राष्ट्रवाद का विचार किसी समुदाय के अनुभव से प्रकट नहीं होना चाहिए। भारतीय राष्ट्रवाद की तुलना यूरोपीय राष्ट्रवाद से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि भारतीय राष्ट्रवाद औपनिवेशिक शोषण के वर्षों बाद यहाँ के लोगों के अनुभव और संघर्ष से पैदा हुआ है। इसलिए यह यूरोपीय राष्ट्रवाद से पूरी तरह से अलग है। राष्ट्रवाद पर वे कहते हैं कि इसे किसी भी समुदाय के सांस्कृतिक अनुभव और ऐतिहासिक अनुभव से अलग नहीं किया जाना चाहिए। यूरोपीय जो मूल रूप से एक उपनिवेशवादी हैं। इसलिए वह सावरकर या किसी और के राष्ट्रवाद के समान नहीं है। ये सभी उपनिवेशीकरण का शिकार हुए हैं।

मोपला नरसंहार पर

थरूर ने अंत में मोपला नरसंहार को क्लीन चिट देने का प्रयास किया, जब लोगों ने मालाबार हिंदू नरसंहार के बारे में उनके पहले के संदर्भ के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने मोपला नरसंहार को किसानों और जमींदारों के बीच संघर्ष की घटना, भौगोलिक कारकों और विभिन्न स्थितियों को जिम्मेदार ठहराया था। साई दीपक ने थरूर की दलीलों का जवाब देते हुए कहा, “आप कैसे तय करते हैं कि किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देना है। इसे आप अपने अनुसार सांप्रदायिक रंग दें या नहीं, यह सिर्फ इस आधार पर नहीं है कि कौन मारा गया या कौन अपराधी थे, बल्कि यह सुनियोजित और टारगेट किए गए लोगों को मारने के इरादे से किया गया था।

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