प्रयागराज में समोसे के लिए आपस में लड़े कॉन्ग्रेस के दो नेता

प्रयागराज: समोसे के लिए आपस में भिड़े कॉन्ग्रेसी, एक-दूसरे को दी गंदी गालियाँ, हसीब अहमद ने इरशाद उल्लाह से ले लिए थे तीन समोसे


प्रयागराज में समोसे के लिए आपस में लड़े कॉन्ग्रेस के दो नेता

— प्रयागराज: समोसे के लिए आपस में भिड़े कॉन्ग्रेसी, एक-दूसरे को दी गंदी गालियाँ, हसीब अहमद ने इरशाद उल्लाह से ले लिए थे तीन समोसे लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं —

विविधताओं से भरे भारत देश में वैसे तो हर जगह की अपनी विशिष्टता है और अपना खानपान है, लेकिन उत्तर भारत में समोसे की अपनी एक अलग ही पहचान है। अक्सर मजाक किया जाता है कि समोसे नहीं मिले तो युद्ध हो जाए। अब यह मजाकर हकीकत बन गया है। ताजा मामले में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कॉन्ग्रेस के नेता सचमुच में इसको लेकर आपस में ही भिड़ गए।

मामला बीते 6 अक्टूबर 2021 का है, जब कॉन्ग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रियंका गाधी की गिरफ्तारी और लखीमपुर की घटना का विरोध कर रहे थे। कॉन्ग्रेसी ट्रैफिक बाधित कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया और उन्हें पुलिस लाइन ले गई। थाने में प्रयागराज के कॉन्ग्रेस सचिव इरशाद उल्लाह पार्टी कार्यकर्ताओं में बाँटने के लिए समोसा लेकर आए। इसी दौरान उन्होंने देखा कि पार्टी के जिला प्रवक्ता हसीब अहमद ने तीन समोसे लिए। इसके वह अहमद से भीड़ गए। दोनों के बीच बात इतनी अधिक बढ़ गई कि दोनों एक-दूसरे को माँ-बहन की गालियाँ देने लगे।

कॉन्ग्रेस के महासचिव नफीस अनवर ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और नेताओं को चेतावनी दी कि वे घर पर नहीं हैं। बावजूद इसके वो नहीं रुके और लड़ते रहे। इसके बाद पुलिस ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।

इस मामले में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर विरोध कर रहे थे, जिसके कारण से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। जब वे पुलिस लाइन में थे तो उनमें से कुछ ने किसी बात को लेकर मारपीट शुरू कर दी। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

हद तो ये है कि खुद कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी समोसे को लेकर लड़ने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को समर्थन दिया है।

इस पर भारतीय जनता पार्टी के राज्य प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने एक ट्वीट किया था, जिस पर 14 अक्टूबर को कॉन्ग्रेस नेता और पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत चिढ़ गए। दरअसल, राकेश त्रिपाठी ने समोसे को लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं की लड़ाई का एक वीडियो साझा किया था। त्रिपाठी ने लिखा था, “दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता के हाथ में तीन समोसे देखकर कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। उन्होंने एक दूसरे के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। अब मामला दर्ज किया गया है। बेचारे कॉन्ग्रेसी।”

चौधरी के ट्वीट पर नाराजगी जताते हुए राजपूत ने कहा, “आप लोग तो करोड़ों के लिए लड़ रहे हो, देश बेचने के लिए लड़ रहे हो। हम लोग तो सिर्फ समोसे के लिए ही लड़ रहे हैं।” इसके साथ ही कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी से प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की माँग की। उन्होंने आगे कहा, “इतना कमा रहे हो आप लोग, कुछ तो ध्यान रखो लोकतंत्र के प्रहरियों का।”

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साभार: ट्विटर

राजपूत के ट्वीट का जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने एक शेर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “समोसे पर एक अनाम शायर का शेर अर्ज है…चलो आज महफ़िल कुछ इस तरह से सजाते हैं, तुम चाय का बंदोबस्त करो, हम समोसे लेकर आते हैं।”

वहीं, ऑपइंडिया से बात करते हुए त्रिपाठी ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी निराश और हताश है। यह जब भी सत्ता में आती है तो आम जनता से लूटपाट करती है। कॉन्ग्रेस को उत्तर प्रदेश पर शासन किए लगभग 32 साल हो चुके हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस का चरित्र नहीं बदला है। उल्लेखनीय है कि वे किसी की थाली में अधिक समोसे भी बर्दाश्त नहीं कर सकते और उन्हें लूटने की कोशिश करते हैं। यह उनके अपने कार्यक्रम में दिखाई दे रहा था, जब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इसलिए लड़ गए कि एक उनमें से अधिक के पास अधिक समोसे थे। कहावत ‘रस्सी भले ही जल गई हो, लेकिन ऐंठन नहीं गई’ इस परिदृश्य में पूरी तरह से फिट बैठती है।”

हाल ही में 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती पर महात्मा गाँधी को ‘वापस आने’ के लिए कहने का पुराना वीडियो वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता हसीब अहमद चर्चा में थे।

वीडियो में उदास अहमद को रोते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, गाँधी जी तस्वीर पकड़े उनके सहयोगी के चेहरे पर शिकन तक नहीं है। इसमें यह भी देखा जा सकता है कि उनके तीन अन्य समर्थक इस कॉन्ग्रेसी की भावुकता से अनजान होकर उनके पीछे खड़े हैं। उनमें से एक मुस्कुरा भी रहा था।

कॉन्ग्रेस नेता ने रोते हुए कहा था, “बापू आप आइए। इस देश को आपकी जरूरत दोबारा पड़ रही है। देश की जनता आपको दोबारा देखना चाहती है। या तो हम लोगों को आप अपने पास बुला लीजिए। ये देश में जो झूठ, मक्कारी और फरेब करके लोग को लूटने का काम कर रहे हैं, उनसे हम लोगों को मुक्ति दिला दीजिए।”

जनवरी 2020 में वह एक कब्रिस्तान में रोते हुए पाए गए थे। नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में कब्रिस्तान में दफन अपने पूर्वजों से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि सीएए भारतीय नागरिकों पर लागू नहीं है और यदि अहमद एक भारतीय नागरिक हैं तो उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने प्रियंका गांधी के लिए जबरदस्त पोस्टर भी बनाए हैं। उनके बारे में यहाँ विस्तार से पढ़ सकते हैं।

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