परिवार में सुसाइड की हिस्ट्री भी बढ़ाती है आत्महत्या की प्रवृत्ति - डॉ अरुणा ब्रूटा

परिवार में सुसाइड की हिस्ट्री भी बढ़ाती है आत्महत्या की प्रवृत्ति – डॉ अरुणा ब्रूटा

World suicide prevention day: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक दुनिया में हर साल सात लाख लोग जीवन से तंग आकर आत्महत्या कर लेते हैं. यानी विश्व में हर 40 सेकेंड में एक आदमी की मौत आत्महत्या करने से होती है. कोई करियर या पढ़ाई में असफल होकर आत्महत्या करता है तो कोई आर्थिक तंगहाली से परेशान होकर आत्मघाती कदम उठाता है. आत्महत्या के कई कारण है. WHO के मुताबिक 77 प्रतिशत आत्महत्या गरीब और मध्य आय वाले देशों में होती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि संपन्न देशों में लोग आत्महत्याएं नहीं करते. अमीर घर के लोग भी आत्महत्याएं करते हैं. हर साल 10 सितंबर को आत्महत्याओं की प्रवृति को रोकने के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस ( World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आत्महत्याओं को रोका जा सकता है?

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शुरुआती दौर में इलाज भी किया जा सकता है
दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर और क्लिनिकल सायकोलॉजिस्ट अरुणा ब्रूटा इस मामले में कहती हैं, आत्महत्या का कदम उठाना इतना अप्रत्याशित (unpredictable) और अचानक होता है कि इसका पहले से पता लगाना मुश्किल है. हालांकि इस तरह के साइंस डेवलप हैं जिससे व्यक्ति के कुछ व्यवहारों में आए परिवर्तनों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति में आत्महत्या की प्रवृति है या नहीं, लेकिन यह विशेषज्ञों के अलावा कोई भी नहीं जान सकता. इसमें भी बहुत शुरुआत में पता चले, तभी इसका इलाज भी किया जा सकता है.

डॉ अरुणा ब्रूटा बताती हैं कि अगर व्यक्ति बहुत ज्यादा आवेशित है, उसमें नकारात्मकता बहुत ज्यादा है तो विशेषज्ञ यह तय कर सकते हैं कि उसे इलाज की जरूरत है. कुछ मामलें में एकदम शुरुआती लक्षण दिखने के बाद ऐसे व्यक्तियों को दवा से भी ठीक किया जा सकता है. हालांकि इस बात की संभावना बहुत कम है कि आम लोग इन संकेतों को पकड़ सके. डॉ अरुणा ब्रूटा ने कहा, आत्महत्या अब भी एक अनसुलझा विज्ञान है जिसपर बहुत काम चल रहा है.

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परिवारिक इतिहास भी आत्महत्या के लिए जिम्मेदार
डॉ अरुणा ब्रूटा ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृति के कुछ वैज्ञानिक कारण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आत्महत्या जेनेटिक भी हो सकती है. अगर किसी व्यक्ति के परिवार में मामा, नाना, पिता, दादा, मां या नानी में से किसी के आत्महत्या की हिस्ट्री है, तो ऐसे व्यक्तियों में भी आत्महत्या की प्रवृत्ति हो सकती है. इसके अलावा कई तरह के बायो केमिकल डिसॉर्डर होते हैं जो आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं.

पर्यावरण भी आत्महत्या का कारण हो सकता है. डॉ ब्रूटा ने बताया, भारत जैसे देशों में अभाव के कारण ज्यादातर लोग आत्महत्याएं करते हैं. अगर बहुत ज्यादा कर्ज हो गया या खाने-पीने की दिक्कत है तो ऐसे मामले में कभी-कभी व्यक्ति खुद तो आत्महत्या कर ही लेते हैं, अपने बच्चे या पत्नी आदि की हत्या भी कर देते हैं. संपन्न परिवार के लोगों में मूड स्विंग और सिजोफ्रेनिक पर्सनेलिटी डिसॉर्डर (schizophrenia personality disorder) आत्महत्या की बड़ी वजह हो सकती है.

भावनात्मक सपोर्ट जरूरी
तो क्या आत्महत्या से लोगों को बचाने के लिए कोई उपाय है? इस पर डॉ अरुणा ब्रूटा ने कहा, हालांकि इसका कोई फुल प्रूफ तरीका नहीं है लेकिन अगर व्यक्ति असामान्य व्यवहार करता है, सिजोफ्रेनिक है, हमेशा नकारात्मकता से भरा रहता है और उसमें आवेश (impulsive) बहुत रहता है तो ऐसे व्यक्ति में आत्महत्या की प्रवृति विकसित हो सकती है.

हां ऐसे व्यक्ति के पास विल पॉवर भी बहुत होना चाहिए क्योंकि बिना विल पॉवर कोई आत्महत्या नहीं कर सकता. इसलिए अवसाद में रहने वाला व्यक्ति आत्महत्या नहीं करता क्योंकि वह कमजोर होता है. अगर इस तरह के व्यक्ति घर में है तो परिवार को इन्हें भावनात्मक रूप से सपोर्ट करना चाहिए न कि इसके लिए किसी जादू-टोने वाले के पास जाना चाहिए.

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