कौन हैं प्रियंका टिबरेवाल, क्या भवानीपुर में ममता बनर्जी को रोकने का है उनमें दमखम?

कौन हैं प्रियंका टिबरेवाल, क्या भवानीपुर में ममता बनर्जी को रोकने का है उनमें दमखम?

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की काली छाया लिए सीएम ममता बनर्जी शुक्रवार (10 सितम्बर 2021) को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगी। वहीं बीजेपी उन्हें काँटे की टक्कर देने के लिए तेजतर्रार वकील प्रियंका टिबरेवाल के नाम की घोषणा आज कर सकती है। जबकि माकपा ने इस सीट से श्रीजीत विश्वास को उम्मीदवार बनाया है। वहीं राजनीतिक जमीन खोती जा रही कॉन्ग्रेस ने पहले ही भवानीपुर से उम्मीदवार घोषित न करने की बात कहकर आत्मसमर्पण कर दिया है।

ऐसे में अब जब मुकाबला ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री मोदी को अपना आदर्श मानने वालीं बीजेपी की संभावित उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल के बीच है तो आइए जान लेते हैं कि कौन हैं बीजेपी की धाकड़ उम्मीदवार जानी-मानी वकील प्रियंका टिबरेवाल।

बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से ही लगातार हिंसा, बलात्कार, धमकी और लूटपाट का खेल चला और अभी सीबीआई जाँच जारी है। इस बीच सैकड़ों बीजेपी कार्यकर्ताओं को जान से हाथ धोना पड़ा। बंगाल में उन्हें बेरहमी से मार दिया गया और प्रशासन मूकदर्शक बनी रही। ऐसे में चुनाव बाद हिंसा के मामले में प्रियंका लगातार अदालत में ममता सरकार को घेरती रही हैं। वह बीजेपी नेता बाबुल सुप्रियो की कानूनी सलाहकार रह चुकी हैं और सुप्रियो की सलाह पर ही अगस्त 2014 में बीजेपी में शामिल हुईं।

साल 2015 में, उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के रूप में वार्ड संख्या 58 (एंटली) से कोलकाता नगर परिषद का चुनाव लड़ा, लेकिन तृणमूल कॉन्ग्रेस के स्वपन समदार से हार गई थीं। बीजेपी में अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए और अगस्त 2020 में, उन्हें पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का उपाध्यक्ष बनाया गया। इस साल उन्होंने एंटली से विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन टीएमसी के स्वर्ण कमल साहा से 58,257 मतों के अंतर से हार गईं।

न्यूज़ 18 से बात करते हुए प्रियंका टिबरेवाल ने कहा, “पार्टी ने मुझसे सलाह ली है और मेरी राय पूछी है कि मैं भवानीपुर से चुनाव लड़ना चाहती हूँ या नहीं? कई नाम हैं और मुझे अभी पता नहीं है कि उम्मीदवार कौन होगा? इतने सालों में मेरा साथ देने के लिए मैं अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को धन्यवाद देना चाहती हूँ। अगर मेरी पार्टी ने मुझे ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर से मैदान में उतारा, तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूँगी और मुझे उम्मीद है कि लोग न्याय बनाम अन्याय की इस लड़ाई में मेरा समर्थन करेंगे। मुझे यकीन है कि लोग सत्तारूढ़ टीएमसी के कुशासन के खिलाफ मतदान करेंगे। यह चुनाव के बाद की हिंसा और बंगाल में लोगों की पीड़ा के खिलाफ हमारी लड़ाई है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं चुनाव बाद हिंसा में बंगाल के तमाम पीड़ितों के साथ खड़ी रही। अदालत में कई केस भी फाइल किए। एंटली के लोग जो TMC के गुंडों के कारण घर छोड़कर चले गए थे उनको वापस घर लाई हूँ। मैं TMC से कहना चाहती हूँ कि बंगाल में ‘खूनी खेला बंद करो।’ मैं भवानीपुर के लोगों से अनुरोध करती हूँ कि वे निर्णय करें कि किसे चुनना चाहते हैं बीजेपी या ममता बनर्जी। एक जो केवल जीतकर कुर्सी बचाना चाहती हैं या दूसरी जो बंगाल में इस अलोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है।”

बता दें कि प्रियंका टिबरेवाल का जन्म 7 जुलाई 1981 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वेलैंड गॉल्डस्मिथ स्कूल से पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद, साल 2007 में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीनस्थ हाजरा लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल कीं। उन्होंने थाईलैंड अनुमान विश्वविद्यालय (Thailand Assumption University) से एमबीए भी किया है।

गौरतलब है कि भवानीपुर के साथ ही मुर्शिदाबाद में विधानसभा की दो सीटों- समशेरगंज और जांगीपुर पर 30 सितंबर को उपचुनाव कराया जाएगा। इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों की मृत्यु के कारण इन दोनों सीटों पर मतदान रद्द कर दिया गया था।

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